सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मीत हेयर की चिंताओं को मिली मजबूती, पैदल चलने के अधिकार को बताया ऐतिहासिक कदम

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मीत हेयर की चिंताओं को मिली मजबूती, पैदल चलने के अधिकार को बताया ऐतिहासिक कदम

Supreme Court verdict reinforces Meet Hayer concerns

Supreme Court verdict reinforces Meet Hayer's concerns

पैदल चलने के अधिकार संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला संसद में मीत हेयर द्वारा उठाए गए मुद्दों की पुष्टि का प्रमाण

लोकसभा में उठाई गई चिंताओं के बावजूद केंद्र सरकार ने दिया था अस्पष्ट जवाब : मीत हेयर

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित और समावेशी परिवहन सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर बताया

चंडीगढ़, 22 जून: Supreme Court verdict reinforces Meet Hayer's concerns, आम आदमी पार्टी के संगरूर से लोकसभा सदस्य गुरमीत सिंह मीत हेयर ने हाल ही में आए माननीय सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत किया है, जिसमें पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथों के उपयोग के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रत्येक नागरिक के सुरक्षित और सम्मानजनक आवागमन के संवैधानिक अधिकार को मजबूत करता है।

मीत हेयर ने कहा कि इस निर्णय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और अन्य गैर-मोटर चालित सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और उनके आवागमन के अधिकारों को लेकर लोकसभा में उठाई गई चिंताओं को मजबूती प्रदान की है।

सांसद ने बताया कि उन्होंने 31 जुलाई 2025 को संसद में प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि क्या सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ उन पर पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों और अन्य गैर-मोटर चालित उपयोगकर्ताओं के सुरक्षित आवागमन के अधिकार को मान्यता देती है तथा कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित और सुलभ बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने हेतु कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।

मीत हेयर ने कहा, “यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने गंभीर मुद्दे के बावजूद केंद्र सरकार ने इसका अत्यंत अस्पष्ट और औपचारिक जवाब दिया। सरकार ने सुरक्षित आवागमन को एक अधिकार के रूप में स्पष्ट रूप से स्वीकार करने अथवा सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित आधारभूत ढांचा सुनिश्चित करने की कोई ठोस रूपरेखा प्रस्तुत नहीं की। इसके बजाय केवल मौजूदा दिशा-निर्देशों, सर्वेक्षणों और सड़क सुरक्षा ऑडिट का हवाला दिया गया, जो बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं था।”

उन्होंने आगे कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से घोषित कर दिया है कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के भाग-3 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है और सरकार को इसे बहुत पहले ही स्वीकार कर लेना चाहिए था।

उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लाखों पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए आशा की नई किरण लेकर आया है। यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि देश में सड़क अवसंरचना केवल वाहनों को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि लोगों की जरूरतों को केंद्र में रखकर विकसित की जाए।”

मीत हेयर ने कहा कि यह फैसला आवागमन के संवैधानिक अधिकार को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इससे भविष्य की परियोजनाओं में अधिकारियों को फुटपाथों, सुरक्षित सड़क पार मार्गों, सार्वभौमिक पहुंच तथा पैदल यात्रियों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने अपने फैसले में कहा है:
“संविधान के भाग-3 के अंतर्गत पैदल चलना एक मौलिक अधिकार है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत प्रदत्त आवागमन के अधिकार का अभिन्न अंग है, जिसे अनुच्छेद 19(1)(ए), अनुच्छेद 19(1)(बी), अनुच्छेद 19(1)(सी) तथा अनुच्छेद 21 के साथ पढ़ा जाना चाहिए।”